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पितृदोष: लक्षण

पितृ दोष के कारण व्यक्ति को बहुत से कष्ट उठाने पड़ सकते हैं, जिनमें

  • विवाह ना हो पाने की समस्या,
  • विवाहित जीवन में कलह रहना,
  • परीक्षा में बार-बार असफल होना,
  • नशे का आदि हो जाना,
  • नौकरी का ना लगना या छूट जाना,
  • गर्भपात या गर्भधारण की समस्या,
  • बच्चे की अकाल मृत्यु हो जाना या फिर मंदबुद्धि बच्चे का जन्म होना,
  • निर्णय ना ले पाना,
  • अत्याधिक क्रोधी होना।

ज्योतिष विद्या में सूर्य को पिता का और मंगल को रक्त का कारक माना गया है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में ये दो महत्वपूर्ण ग्रह पाप भाव में होते हैं तो व्यक्ति का जीवन पितृदोष के चक्र में फंस जाता है।

पितृदोष के बहुत से ज्योतिषीय कारण भी हैं, जैसे जातक के लग्न और पंचम भाव में सूर्य, मंगल एवं शनि का होना और अष्टम या द्वादश भाव में बृहस्पति और राहु स्थित हो तो पितृदोष के कारण संतान होने में बाधा आती है।

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